वाशिंगटन : सऊदी अरब अपनी बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन इकाई का विस्तार कर रहा है। इससे वह अधिक दूरी तक मार करने या भारी विस्फोटक ले जाने वाली ठोस ईंधन मिसाइलें बना सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने एक साल से अधिक समय की उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यह आकलन किया है। विदेश नीति अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ता सैम लेयर और माइकल ड्यूट्समैन के अनुसार, रियाद से करीब 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित अल-दुवादिमी परिसर में एक नई इमारत बनाई गई है। इसमें मिसाइलों के ठोस ईंधन को तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष गड्ढे होने की आशंका है। यह इमारत मौजूदा सुविधा से कम से कम दोगुनी बड़ी है। परिसर में एक अन्य नई इमारत भी दिखी है, जिसका इस्तेमाल ईंधन सामग्री या तैयार पुर्जे रखने के लिए हो सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, नई मिसाइलें ईरान के हमलों को रोकने और सऊदी अरब की सैन्य आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, इससे क्षेत्र में मिसाइलों की होड़ तेज होने और अमेरिका-सऊदी अरब के प्रस्तावित असैन्य परमाणु समझौते पर विरोध बढ़ने की आशंका है।
