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मिजोरम में मातृ-नवजात मृत्यु रोकने के लिए सुमन रोडमैप 2030 लागू
১৬/১০/২০২৬

आइजोल :
मिजोरम सरकार ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने तथा मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से ‘सुमन रोडमैप 2030’ की शुरुआत की है। राज्य की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री लालरिनपुई ने शुक्रवार को आइजोल में प्रजनन, मातृ, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य (आरएमएनसीएच) कार्यक्रम की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान इस रोडमैप का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य गर्भावस्था से लेकर प्रसव और प्रसव के बाद तक महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना, नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना तथा स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाना है। सरकार ने वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात को प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 70 से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही नवजात और बाल मृत्यु दर में कमी लाने तथा टाली जा सकने वाली मौतों को रोकने पर भी जोर दिया जाएगा। केंद्र की सुमन पहल से जुड़ा रोडमैप
सुमन यानी ‘सुरक्षित मातृत्व आश्वासन’ केंद्र सरकार की पहल है, जिसे वर्ष 2019 में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को सम्मानजनक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। मिजोरम में रोडमैप का क्रियान्वयन इसी व्यापक उद्देश्य को आगे बढ़ाने की दिशा में किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने कहा कि माताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अधिकारियों और विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने सरकारी विभागों, संगठनों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, इस योजना की सफलता का आकलन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार मिल रहा है या नहीं, नवजात शिशुओं के जीवित रहने की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं या नहीं और रोकी जा सकने वाली मौतों में कितनी कमी आ रही है। संस्थागत प्रसव की दर 93 प्रतिशत तक पहुंची
राज्य की स्वास्थ्य सचिव लालजारमावी ने समीक्षा बैठक में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी दी। उनके अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में मिजोरम में संस्थागत प्रसव की दर लगभग 93 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं, गर्भावस्था की पहली तिमाही में प्रसवपूर्व देखभाल के लिए पंजीकरण की दर लगभग 81 प्रतिशत रही। ये आंकड़े स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में हुई प्रगति को दर्शाते हैं। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि राज्य के सभी जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ समान रूप से नहीं पहुंच रहा है। विशेष रूप से कुछ क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव और समय पर प्रसवपूर्व जांच को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि दक्षिणी मिजोरम के लॉन्गतलाई और लुंगलेई जिलों में संस्थागत प्रसव की दर तुलनात्मक रूप से कम है। इसके अतिरिक्त, राज्य के एकमात्र आकांक्षी जिले ममित में भी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और बेहतर पहुंच की जरूरत बनी हुई है। घर पर प्रसव और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता चुनौती
स्वास्थ्य सचिव ने चिंता जताई कि राज्य में अब भी कुछ मामलों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता के बिना घर पर प्रसव हो रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रसव के दौरान जटिलताएं उत्पन्न होने पर मां और नवजात दोनों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। इसी चुनौती को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि समीक्षा बैठक में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। राज्य और जिला स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी तथा समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास महत्वपूर्ण होंगे। दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाना भी राज्य के लिए अहम चुनौती है। वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु में कमी का लक्ष्य
सुमन रोडमैप 2030 के तहत मिजोरम सरकार का लक्ष्य केवल प्रसव के दौरान होने वाली मौतों को कम करना नहीं, बल्कि गर्भावस्था से लेकर प्रसवोत्तर अवधि तक मां और बच्चे के स्वास्थ्य की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करना है।इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता होगी। साथ ही, कम संस्थागत प्रसव वाले जिलों और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित आबादी पर विशेष ध्यान देना होगा। राज्य सरकार के सामने अब इस रोडमैप के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने की चुनौती है। संस्थागत प्रसव की दर में सुधार, पहली तिमाही में पंजीकरण बढ़ाने, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता से प्रसव सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी से यह तय होगा कि मिजोरम वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के अपने लक्ष्य की दिशा में कितनी प्रगति करता है।মূল প্রতিবেদনে যান ↗