Sanmarg · সাধারণ
35 साल बाद कैलाशहर हवाई अड्डे से उड़ानें शुरू कराने में जुटी त्रिपुरा सरकार
১৪/১০/২০২৬

उड़ान योजना के तहत हवाई अड्डे के पुनर्विकास की समीक्षा
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अधिकारियों से मांगी प्रगति रिपोर्ट
अगरतला :
त्रिपुरा सरकार ने उनाकोटी जिले के कैलाशहर हवाई अड्डे से करीब 35 साल बाद फिर से विमान सेवाएं शुरू कराने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री प्रो. डॉ. माणिक साहा ने राज्य में हवाई संपर्क मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्र के सहयोग से इस हवाई अड्डे को दोबारा परिचालन में लाने की दिशा में काम कर रही है। मंगलवार को सचिवालय के सम्मेलन कक्ष में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में हवाई अड्डे के पुनर्विकास और केंद्र की क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ के तहत चल रही गतिविधियों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कैलाशहर हवाई अड्डा विमान संचालन के लिए तकनीकी और परिचालन संबंधी मानकों पर खरा उतरता है, तो इससे राज्य के भीतर हवाई संपर्क बेहतर होने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी लाभ मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य हवाई सेवाओं के विस्तार के साथ राज्य की आर्थिक गतिविधियों और राजस्व में भी वृद्धि करना है। उड़ान योजना के तहत पुनर्विकास पर जोर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कैलाशहर हवाई अड्डे के पुनर्विकास से संबंधित उड़ान योजना के पहले चरण की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि हवाई सेवाएं फिर शुरू कराने के लिए राज्य सरकार हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगी। करीब साढ़े तीन दशक से नियमित उड़ान सेवाओं से दूर इस हवाई अड्डे को दोबारा सक्रिय करने की पहल उत्तरी त्रिपुरा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, उड़ानों की वास्तविक शुरुआत हवाई अड्डे की उपयुक्तता, आवश्यक बुनियादी ढांचे, तकनीकी मंजूरी और विमानन परिचालन की शर्तें पूरी होने पर निर्भर करेगी। फिलहाल सरकार की ओर से उड़ानें शुरू होने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। स्थानीय संपर्क और सुरक्षा को मिलेगा महत्व
मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार, कैलाशहर से विमान सेवाएं शुरू होने पर राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे दूरस्थ इलाकों तक पहुंच आसान होने और क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की संभावना है। कैलाशहर उनाकोटी जिले का प्रमुख शहरी केंद्र है। यहां हवाई संपर्क विकसित होने से यात्रियों, कारोबारियों और अन्य लोगों को वैकल्पिक परिवहन सुविधा मिल सकती है। साथ ही, आपातकालीन परिस्थितियों में आवागमन और रणनीतिक दृष्टि से भी हवाई अड्डे की उपयोगिता महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, नियमित उड़ानों के संचालन के लिए पर्याप्त यात्री मांग, एयरलाइनों की भागीदारी और आर्थिक व्यवहार्यता जैसे पहलुओं का आकलन भी जरूरी होगा। राज्य के राजस्व में वृद्धि पर भी नजर
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि हवाई सेवाएं शुरू करने की पहल के साथ राज्य के राजस्व में वृद्धि की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। त्रिपुरा सरकार राज्य में परिवहन सुविधाओं के विस्तार को विकास की व्यापक रणनीति का हिस्सा मान रही है। कैलाशहर हवाई अड्डे को दोबारा चालू करने का प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि हवाई अड्डे का संचालन आर्थिक रूप से टिकाऊ रहे और यात्रियों को नियमित सेवाएं उपलब्ध हो सकें। डुंबूर पर्यटन स्थल पर हेलीपैड जल्द बनाने का निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने डुंबूर पर्यटन स्थल पर हेलीपैड का निर्माण जल्द पूरा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाना और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देना है। डुंबूर अपने प्राकृतिक आकर्षणों और जलाशय के लिए जाना जाता है। यहां बेहतर हवाई पहुंच विकसित होने से पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। सरकार की योजना परिवहन सुविधाओं में सुधार के माध्यम से राज्य के पर्यटन स्थलों को अधिक सुलभ बनाना है। बैठक में परिवहन मंत्री सुशांत चौधरी, मुख्य सचिव जे.के. सिन्हा, मुख्यमंत्री के सचिव किरण गित्ते, राजस्व सचिव मिलिंद रामटेके, परिवहन विभाग के कार्यवाहक सचिव तपस रॉय, अगरतला स्थित महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डे के निदेशक और विभिन्न विभागों के अतिरिक्त सचिव उपस्थित थे। उड़ानों की बहाली के लिए आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण
कैलाशहर हवाई अड्डे को दोबारा चालू करने की पहल से क्षेत्रीय संपर्क और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की उम्मीद है। लेकिन इसके लिए बुनियादी ढांचे की स्थिति, विमान संचालन की सुरक्षा, तकनीकी उपयुक्तता और एयरलाइनों की व्यावसायिक रुचि जैसे पहलुओं पर आगे काम करना होगा। राज्य सरकार ने केंद्र के सहयोग से प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा दिया है। अब हवाई अड्डे के पुनर्विकास की प्रगति और आवश्यक मंजूरियों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि कैलाशहर से नियमित उड़ान सेवाएं कब शुरू हो सकती हैं।মূল প্রতিবেদনে যান ↗