मुर्शिदाबाद : लालगोला के तारानगर में शुक्रवार को पद्मा फिर उग्र हो गई l। इस दिन सुबह से ही मस्जिद के सामने अचानक कटाव शुरू हो गया। भयानक पद्मा ने ज़मीन, रिहायशी इलाकों और सड़कों को निगलना शुरू कर दिया। कई बीघा जमीन, सड़कें और पेड़ नदी में समा गए। पद्मा के नए कटाव की खबर मिलते ही तारानगर के लोगों में बहुत ज्यादा डर फैल गया। तारानगर के डरे हुए लोग नदी किनारे से भागे। लोगों की शिकायत है कि कटाव की खबर फैलने के बावजूद कोई प्रशासनिक अधिकारी या कोई जनप्रतिनिधि नजर नहीं आया। लालगोला के MLA अब्दुल अज़ीज़ ने कहा, मैंने मुख्यमंत्री को तारानगर के कटाव के बारे में बताया है। उन्होंने समस्या के पक्के समाधान का भरोसा दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सालों से पद्मा के लगातार कटाव से तारानगर के खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है। पद्मा के किनारे बसा गांव लालगोला के नक्शे से मिटने के कगार पर आ गया है। गांव के बुज़ुर्गों ने बताया कि तारानगर में पहले पांच सौ से ज्यादा परिवार रहते थे। वहीं पिछले कुछ सालों में पद्मा के लगातार कटाव की वजह से तीन सौ से ज्यादा परिवार अपने घर और खेती की ज़मीन खो चुके हैं। इनमें से कुछ रिश्तेदारों के घर, कुछ स्कूल के राहत कैंप में और कुछ नदी के किनारे खुले आसमान के नीचे टेंट में अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने घर गंवाने वाले सौ से ज्यादा परिवारों को जमीन दी है, लेकिन कई लोगों ने घर नहीं बनाए कारण वह जगह रहने लायक नहीं थी। पिछले साल के कटाव में पूर्व पंचायत सदस्य मोहम्मद जकारिया के दो घर नदी में बह गए थे। घरों का कुछ हिस्सा बच गया था। गुरुवार सुबह हुए कटाव में बाकी जमीन भी नदी में चली गई। जकारिया ने कहा, पिछले साल जब से दो घर चले गए हैं, मैं एक रिश्तेदार के यहां टेंट में रह रहा हूं। पिछले साल जिस घर में मैं रहता था, उसमें जो थोड़ी जगह बची थी, वह भी इस साल पद्मा के गर्भ में चली गई है। एक गांव वाले ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, मिट्टी का कटाव रोकने के लिए तटबंध बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, फिर भी नदी हर साल टूट रही है, लोग बेघर और बेरोजगार हो रहे हैं। पद्मा को रोकने के लिए हमें रेत और मिट्टी की बोरियों का नहीं, बल्कि कंक्रीट का इस्तेमाल करना होगा। लेकिन हमारी कौन सुनेगा?
