लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अंबेडकर नगर जिले में विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन और आलापुर सीट को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किए जाने को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि याचिका दायर करने में अत्यधिक देरी हुई और याचिकाकर्ता संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन को साबित करने में विफल रहा।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने बुधवार को लखनऊ में सुनवाई के दौरान कहा कि पांच दिसंबर 2006 को जारी परिसीमन आदेश अब कानून का रूप ले चुका है।
इसे केवल जनसंख्या और जातिगत आंकड़ों की अलग गणना के आधार पर दोबारा नहीं खोला जा सकता। यह याचिका अंबेडकर नगर के निवासी एवं मतदाता दिलीप कुमार ने दायर की थी। उन्होंने जिले के विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन और आरक्षण की समीक्षा की मांग की थी।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि कटेहरी, टांडा, आलापुर, जलालपुर और अकबरपुर विधानसभा क्षेत्रों में जनसंख्या का वितरण असमान है, जो संविधान के अनुच्छेद 170(2) का उल्लंघन है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जलालपुर की जनसंख्या 4,60,245, जबकि अकबरपुर की 3,68,722 है। उन्होंने आलापुर को आरक्षित रखने के औचित्य पर भी सवाल उठाया।
खंडपीठ ने कहा कि अनुच्छेद 170(2) के तहत जनसंख्या और सीटों के बीच समानता जहां तक संभव हो, सुनिश्चित की जानी चाहिए। परिसीमन आयोग भौगोलिक निकटता और प्रशासनिक सीमाओं सहित अन्य कारकों पर भी विचार कर सकता है। औसत जनसंख्या से 10 प्रतिशत तक अंतर की अनुमति देने वाले आंतरिक दिशानिर्देश बाध्यकारी कानूनी अधिकार नहीं हैं।
अदालत ने कहा कि परिसीमन आदेशों की न्यायिक समीक्षा सीमित है और याचिकाकर्ता कोई वैध आधार साबित नहीं कर सका। लगभग दो दशक बाद, कई चुनाव हो जाने और 2026 की जनगणना के बाद नए परिसीमन की संभावना को देखते हुए आदेश दोबारा खोलना उचित नहीं होगा।
