अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत के पूर्व कार्यकारी निदेशक कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम ने पाकिस्तान के वैश्विक वित्तीय नेतृत्व में वापसी के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि IMF और विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता केवल एक औपचारिक भूमिका है, जो हर साल बदलती रहती है।
सुब्रमण्यम ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान का 2027 में IMF-वर्ल्ड बैंक की वार्षिक पूर्ण बैठक की अध्यक्षता करना वैश्विक वित्त में ताकत हासिल करने के समान नहीं है। उन्होंने लिखा, “यह प्रोटोकॉल है, शक्ति नहीं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इस वर्ष पराग्वे और 2025 में केप वर्डे को भी यह जिम्मेदारी मिली थी।
पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि देश को 2027 के लिए IMF और विश्व बैंक समूह के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का अगला अध्यक्ष चुना गया है। पाकिस्तान 1953 के बाद पहली बार इस पद पर लौटेगा। बैंक के गवर्नर और आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा को बैंकॉक में आयोजित 2026 की वार्षिक बैठक के पूर्ण सत्र के दौरान औपचारिक रूप से अगला अध्यक्ष घोषित किया गया।
पाकिस्तान के मंत्रालय ने इस घटनाक्रम को “ऐतिहासिक उपलब्धि” बताते हुए कहा था कि इससे इस्लामाबाद को वैश्विक आर्थिक और विकास संबंधी चर्चाओं में योगदान देने तथा सदस्य देशों के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा। 12 से 18 अक्टूबर तक आयोजित IMF-वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठकों में 191 देशों के 15,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
इस बीच, पाकिस्तान IMF के साथ 7 अरब डॉलर की विस्तारित निधि सुविधा (EFF) और 1.4 अरब डॉलर की लचीलापन एवं स्थिरता सुविधा (RSF) के तहत वित्तीय सहायता कार्यक्रमों में शामिल है। EFF का उद्देश्य देश की भुगतान संतुलन संबंधी जरूरतों को पूरा करना और आर्थिक सुधारों को समर्थन देना है, जबकि RSF के तहत जलवायु संबंधी जोखिमों से निपटने और देश की क्षमता मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण उपलब्ध कराया जाता है।
पाकिस्तान को इन दोनों ऋण कार्यक्रमों की हालिया समीक्षा पर IMF के कर्मचारियों और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच सहमति बनने के बाद लगभग 1.2 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि मिलने की भी उम्मीद है। हालांकि, यह भुगतान IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
