कोलकाता : दुर्गापूजा से पहले कोलकाता में मछलियों की कीमतों में तेज उछाल ने आम लोगों से लेकर रेस्तरां कारोबारियों तक की चिंता बढ़ा दी है। बंगाल की खाड़ी में कम मछली मिलने, गुजरात और ओडिशा से सीमित आपूर्ति तथा बांग्लादेश से हिलसा की खेप नहीं आने के कारण बाजार में मछलियों की कमी हो गई है।
इसका असर पूजा के पारंपरिक खानपान पर भी पड़ने की आशंका है। कई रेस्तरां चुनिंदा मछली के व्यंजनों की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने पर विचार कर रहे हैं।
बांग्लादेशी हिलसा गायब, म्यांमार की मछली पर निर्भरता
पूजा के दौरान सबसे ज्यादा मांग वाली हिलसा मछली की उपलब्धता इस बार सीमित है। बांग्लादेश से हिलसा की आपूर्ति नहीं होने और स्थानीय स्तर पर कम पकड़ के कारण बाजार में म्यांमार की हिलसा प्रमुख विकल्प बनी हुई है।
हवाई मार्ग से आने वाली ताजा हिलसा की कीमत 2,200 से 2,500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि फ्रोजन हिलसा करीब 2,000 रुपये प्रति किलो बिक रही है। फिश इंपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मकसूद के अनुसार, कारोबारियों ने बांग्लादेश से हिलसा मंगाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। फिलहाल म्यांमार से सप्ताह में दो बार हवाई मार्ग से खेप आ रही है।
भेटकी, पॉम्फ्रेट और झींगा भी हुए महंगे
मछलियों की कमी का असर केवल हिलसा तक सीमित नहीं है। रेस्तरां में फिश फिंगर्स, फिश तंदूरी और अन्य व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाली भेटकी की कीमत भी बढ़ गई है। चार किलो से अधिक वजन वाली भेटकी करीब 800 रुपये प्रति किलो, मध्यम आकार की 750 रुपये और छोटी स्थानीय किस्में लगभग 700 रुपये प्रति किलो बिक रही हैं।
टाइगर प्रॉन यानी बागदा झींगा की कीमत आकार के अनुसार 800 से 1,200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। पिछले दुर्गापूजा के दौरान यही कीमत 700 से 1,000 रुपये प्रति किलो थी। वहीं, लगभग 125 ग्राम वजन वाला पॉम्फ्रेट 750 से 800 रुपये प्रति किलो और 150 से 200 ग्राम वाला पॉम्फ्रेट करीब 1,200 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। विशाल मीठे पानी के झींगे यानी गोलदा की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
रेस्तरां के मेन्यू पर असर, ग्राहकों को चुकानी होगी ज्यादा कीमत
फ्री स्कूल स्ट्रीट स्थित प्रिंस रेस्तरां के चायन साहा ने बताया कि बाजार में मछलियों की उपलब्धता घटने से लगभग सभी किस्मों के दाम बढ़े हैं। उनके अनुसार, रोहू, कतला और पाबदा जैसी मछलियों के अलावा बाजार में विकल्प सीमित हैं।
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा कि पूजा के दौरान मछलियों की मांग बढ़ने से कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इस स्थिति में आम परिवार रोहू, कतला और पाबदा जैसी अपेक्षाकृत किफायती मछलियों का रुख कर सकते हैं।
पाबदा फिलहाल आकार के अनुसार 450 से 600 रुपये प्रति किलो बिक रही है। कुल मिलाकर, इस दुर्गापूजा में मछली के शौकीनों को अपने बजट के अनुसार खरीदारी करनी पड़ सकती है और रेस्तरां में पसंदीदा व्यंजनों के लिए अधिक खर्च करना पड़ सकता है
