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यूजीसी नियमों के उल्लंघन पर कुलपति की नियुक्ति रद्द
১৭/১০/২০২৬

अदालत ने चार महीने के भीतर योग्य अंतरिम कुलपति नियुक्त करने का दिया निर्देश
सिलचर :
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम विश्वविद्यालय, सिलचर के कुलपति डॉ. राजीव मोहन पंत की नियुक्ति को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अनिवार्य पात्रता मानदंडों और नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं के आधार पर रद्द कर दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर योग्य अंतरिम कुलपति नियुक्त करने और नियमित कुलपति के चयन की नई प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। यह फैसला केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शीर्ष शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति के लिए निर्धारित नियमों के अनुपालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला
न्यायमूर्ति एन. उन्नी कृष्णन नायर की पीठ ने 14 अक्टूबर 2026 को डॉ. समीरा बेहरा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में डॉ. पंत की नियुक्ति को चुनौती दी गई थी। उनका चयन जनवरी 2022 में कुलपति के पद पर किया गया था।याचिकाकर्ता का तर्क था कि डॉ. पंत की नियुक्ति यूजीसी विनियम, 2018 में निर्धारित अनिवार्य योग्यताओं के अनुरूप नहीं थी। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेजों और चयन समिति की बैठकों के रिकॉर्ड की जांच की।अदालत ने नियुक्ति को रद्द करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में उम्मीदवार की पात्रता को लेकर उठे सवालों का संतोषजनक समाधान रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया था।प्रोफेसर के रूप में अनुभव को लेकर सवाल
मामले में कुलपति पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक अनुभव प्रमुख मुद्दा था। यूजीसी विनियम, 2018 के तहत कुलपति पद के उम्मीदवार के लिए उच्च स्तर की शैक्षणिक योग्यता और विश्वविद्यालय या उच्च शिक्षण संस्थान में प्रोफेसर के रूप में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव निर्धारित है।अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, चयन समिति ने 26 जून 2021 की बैठक में डॉ. पंत की पात्रता की पुष्टि किए जाने की शर्त के साथ उन्हें संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल किया था। इसके बाद 23 से 25 जुलाई 2021 के बीच हुई बैठकों में समिति ने पांच नामों का पैनल तैयार किया, जिसमें डॉ. पंत भी शामिल थे।हालांकि, अदालत ने पाया कि अंतिम बैठक के रिकॉर्ड में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि पहले उठाई गई पात्रता संबंधी आशंका का समाधान किस आधार पर किया गया। अदालत के अनुसार, उम्मीदवार का नाम अंतिम पैनल में शामिल करने से पहले उसकी निर्धारित योग्यता की स्पष्ट पुष्टि आवश्यक थी।चयन समिति के रिकॉर्ड पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से चयन समिति की बैठकों के मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय की ओर से रिकॉर्ड पेश करने में देरी हुई, जिसके बाद अदालत ने 28 अगस्त 2026 को मंत्रालय के एक सक्षम अधिकारी को मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया।10 सितंबर को मंत्रालय के उपसचिव हेमंत कुमार और अवर सचिव जॉयफुल जेड. खावजावल अदालत में उपस्थित हुए और 3 जून, 26 जून तथा 23-25 जुलाई 2021 की बैठकों के कार्यवृत्त प्रस्तुत किए।इन दस्तावेजों की जांच के बाद अदालत ने पाया कि चयन समिति ने पात्रता पर सवाल उठाए थे, लेकिन अंतिम सिफारिश से पहले उन सवालों के समाधान का पर्याप्त आधार दर्ज नहीं किया। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि नियुक्ति विज्ञापन की शर्तों और यूजीसी विनियम, 2018 के नियम 7.3 के अनुरूप नहीं थी।चार महीने में नई चयन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विश्वविद्यालय के किसी योग्य व्यक्ति को अंतरिम रूप से कुलपति का प्रभार सौंपा जाए, ताकि नियमित नियुक्ति होने तक प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो। इसके साथ ही चार महीने के भीतर पात्र उम्मीदवार की नियुक्ति के लिए नई चयन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय के नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। विश्वविद्यालय प्रशासन और केंद्र सरकार को अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी।केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय के अगले कदम पर नजर
असम विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है, जिसका मुख्यालय सिलचर में है। यहां असम सहित पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं। कुलपति का पद विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और नीतिगत कामकाज के लिए महत्वपूर्ण होता है।विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रदोष किरण नाथ के अनुसार, अदालत के आदेश से संबंधित जानकारी नई दिल्ली स्थित अधिकारियों को भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई के लिए केंद्र के जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है। अदालत के फैसले ने विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के दौरान पात्रता की जांच, चयन समिति की जवाबदेही और प्रक्रिया के दस्तावेजीकरण के महत्व को फिर सामने ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी निर्धारित समयसीमा में अंतरिम व्यवस्था और नई नियुक्ति प्रक्रिया को किस प्रकार पूरा करते हैं।মূল প্রতিবেদনে যান ↗