जयपुर : जयपुर में नवरात्र के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। शहर में आयोजित होने वाले इन सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन स्थलों के बाहर एक हिंदू संगठन द्वारा सैकड़ों की संख्या में बैनर लगाए गए हैं। इन बैनरों के माध्यम से स्पष्ट रूप से संदेश दिया गया है कि गरबा और डांडिया पंडालों के भीतर गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित (प्रतिबंधित) है।
यह कदम स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है। यह मुहिम सनातन सुरक्षा दल नामक संगठन की ओर से चलाई जा रही है। संगठन ने जयपुर के विभिन्न इलाकों में स्थित गरबा और डांडिया स्थलों के बाहर जो बैनर टांगे हैं, उन पर साफ शब्दों में लिखा है-'गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।'
इस कदम का मुख्य उद्देश्य आयोजनों के भीतर केवल एक निश्चित समुदाय के लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। संगठन के संस्थापक रवि गौतम ने इस अभियान की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नवरात्र का त्योहार शुरू होने से ठीक पहले ही इसके लिए एक व्यापक अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली गई थी।
संगठन की ओर से सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों का उपयोग करके जयपुर के सभी प्रमुख गरबा आयोजकों से एक विशेष अपील की गई थी। इस अपील में आयोजकों से कहा गया था कि वे इन आयोजनों की धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और प्राचीन रीति-रिवाजों की पवित्रता को बनाए रखने में सहयोग करें।
इस व्यवस्था और प्रतिबंध को जमीन पर लागू करने के लिए संगठन ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। रवि गौतम के अनुसार, जयपुर के अलग-अलग क्षेत्रों और आयोजन स्थलों पर नजर रखने के लिए 27 विशेष दल (टीमें) तैनात की गई हैं। ये सभी दल निरंतर सक्रिय रहेंगे और गरबा आयोजकों के साथ सीधे संपर्क में बने रहेंगे, ताकि पंडालों के भीतर की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जा सके।
इसके साथ ही, सनातन सुरक्षा दल ने आयोजकों के सामने कुछ प्रमुख सुझाव और मांगें भी रखी हैं। संगठन ने अपील की है कि पंडाल में प्रवेश देने से पहले सभी प्रतिभागियों के आधिकारिक पहचान पत्रों (ID Cards) की गहन जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, एंट्री प्वॉइंट पर पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए प्रतिभागियों के माथे पर तिलक लगाने और कलाई पर रक्षासूत्र (कलावा) बांधने की अनिवार्य व्यवस्था की जाए।
संगठन के संस्थापक का मानना है कि गरबा महज मनोरंजन या नृत्य का कोई सामान्य आयोजन नहीं है, बल्कि यह गहरी धार्मिक आस्था, मां दुर्गा की भक्ति और गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ पर्व है। इसलिए इसकी आध्यात्मिक पवित्रता और मर्यादा को हर हाल में अक्षुण्ण बनाए रखा जाना चाहिए।
