नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज में उभरती नई चुनौतियों और सामाजिक बुराइयों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए नागरिकों से विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ देश और समाज के सामने चुनौतियों का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को जागरूक, आत्मनिर्भर और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध बनाना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए समाज के सभी वर्गों को इस संकल्प से जोड़ने की जरूरत भी रेखांकित की।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नई दिल्ली में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है, जो भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और जीवन मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में ऐसे प्रयासों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है, क्योंकि समाज को सकारात्मक दिशा देने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की जिम्मेदारी सभी की है।
चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी :
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में समय बदला है और देश के सामने नई चुनौतियां उभरी हैं। समाज में भी नई बुराइयां सामने आई हैं, जिनसे निपटने की जिम्मेदारी सभी नागरिकों की है। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतों के विरुद्ध एकजुट होकर काम करना होगा। साथ ही नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक और प्रेरित करना आवश्यक है। मोदी ने जोर दिया कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना होगा। इस दिशा में सामाजिक और आध्यात्मिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। प्रधानमंत्री ने इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अधिक सक्रियता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
