सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम -- निकोबार जिले के कार निकोबार द्वीप में सूअरों के बीच क्लासिक स्वाइन ज्वर के प्रकोप की पुष्टि होने के बाद अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में सूअरों तथा सूअर के मांस से बने उत्पादों के परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। राज्य पशु रोग आपातकालीन नियंत्रण समिति की सिफारिश के बाद यह कदम उठाया गया है।
प्रशासन ने सूअर पालकों, किसानों, व्यापारियों, परिवहन संचालकों और अन्य संबंधित लोगों को निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक किसी भी माध्यम से जीवित सूअरों अथवा सूअर के मांस और उससे बने उत्पादों का परिवहन नहीं किया जाए।
क्लासिक स्वाइन ज्वर एक अत्यधिक संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है, जो घरेलू सूअरों और जंगली सूअरों को प्रभावित करती है। यह बीमारी संवेदनशील पशुओं के बीच तेजी से फैल सकती है और इसके कारण बड़ी संख्या में पशुओं की मृत्यु हो सकती है। इससे सूअर पालन करने वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बीमारी मनुष्यों में नहीं फैलती है और इसे पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला रोग नहीं माना जाता।
यह बीमारी पशुओं में संक्रामक एवं संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम, 2009 के अंतर्गत अधिसूचित है। क्षेत्र में बीमारी के प्रसार को रोकने और सूअरों की आबादी को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से राज्य पशु रोग आपातकालीन नियंत्रण समिति ने सूअरों तथा सूअर के मांस से बने उत्पादों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी।
इसी सिफारिश के आधार पर अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने पूरे द्वीपसमूह में सूअरों, सूअर के मांस और उससे बने उत्पादों के परिवहन पर रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और अगले आदेश तक जारी रहेगा। इसके अंतर्गत जीवित सूअरों, सूअर के चारे, सूअर के मांस, उससे बने उत्पादों तथा जमे हुए मांस को भी शामिल किया गया है। समुद्र, हवाई मार्ग या सड़क मार्ग से किसी भी प्रकार के वाहक के माध्यम से इनका परिवहन नहीं किया जा सकेगा।
पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने सूअर पालकों और किसानों से बीमारी की रोकथाम के लिए सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने निर्देश दिया है कि किसी भी सूअर में बीमारी के लक्षण दिखाई देने, असामान्य रूप से बीमार पड़ने अथवा अचानक मृत्यु होने की स्थिति में तुरंत निकटतम पशु चिकित्सा संस्थान को सूचित किया जाए। प्रतिबंध लागू रहने तक सूअरों की आवाजाही नहीं की जानी चाहिए। बीमारी से प्रभावित अथवा संक्रमित होने की आशंका वाले सूअरों की बिक्री, खरीद या स्थानांतरण से भी बचना आवश्यक है।
विभाग ने सूअर पालन स्थलों पर साफ-सफाई बनाए रखने और सूअरों के बाड़ों, उपकरणों तथा वाहनों की नियमित सफाई एवं कीटाणुशोधन सुनिश्चित करने की सलाह दी है। सूअर पालन परिसरों में अनावश्यक लोगों, व्यापारियों और वाहनों के प्रवेश को सीमित रखने तथा जैव सुरक्षा के निर्धारित उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है। मृत सूअरों, उनके शवों अथवा पशु अपशिष्ट को खुले स्थानों या जल स्रोतों में फेंकने से बचने का निर्देश दिया गया है।
संबंधित लोगों से बीमारी के संदिग्ध मामलों अथवा सूअरों की असामान्य मृत्यु की जानकारी छिपाने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सा अधिकारियों को सूचित करने की अपील की गई है। विभाग ने बीमारी की निगरानी, जांच और नियंत्रण अभियान के दौरान अधिकारियों के साथ सहयोग करने तथा पशुपालन विभाग की ओर से जारी सभी निर्देशों का पालन करने को कहा है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिवहन प्रतिबंध का कड़ाई से पालन, संदिग्ध मामलों की समय पर सूचना और निर्धारित रोग नियंत्रण उपायों को अपनाना बीमारी के आगे प्रसार को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक है। सभी सूअर पालकों और किसानों से सतर्क रहने तथा अपने पशुओं की सुरक्षा के लिए उचित जैव सुरक्षा उपाय अपनाने का आग्रह किया गया है।
