कोलकाता: मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन को सुरक्षित, सुचारु और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए केएमसी ने व्यापक तैयारियां की हैं। निगम क्षेत्र के 27 विसर्जन घाटों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, पेयजल, स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। विसर्जन अवधि के दौरान 24 अक्टूबर तक चौबीसों घंटे व्यवस्थाएं संचालित की जाएंगी।
निगम की ओर से इस कार्य के लिए विभिन्न विभागों के कुल 611 अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है। विसर्जन की पूरी प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने के लिए कोलकाता पुलिस, सिंचाई विभाग, आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट सहित संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। निगम के उद्यान एवं उद्यान परिसर, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रकाश, सिविल और स्वास्थ्य विभाग भी इस अभियान में शामिल रहेंगे।
27 घाटों पर विसर्जन की व्यवस्था
महानगर के कुल 27 घाटों पर प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था की गई है। इनमें बाजे कदमतला घाट, जजेस घाट, दई घाट, निमतला घाट, अहिरीटोला घाट, बिचाली घाट, शोभाबाजार घाट, रतनबाबू घाट, सर्वमंगला घाट और कुम्हारटोली घाट सहित अन्य घाट शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर आम लोगों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।
चिकित्सा सहायता के लिए 43 दल और सात एंबुलेंस
विसर्जन के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए केएमसी के 43 चिकित्सा दलों को तैनात किया गया है। इसके अलावा, निगम की सात एंबुलेंस भी तैयार रखी गई हैं। सभी घाटों को कवर करने के लिए आठ चिकित्सा दलों की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।
जलक्षेत्र में एनडीआरएफ की तैनाती
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए प्रमुख घाटों पर एनडीआरएफ की आठ टीमें तैनात की गई हैं। प्रत्येक टीम में 35 जवान शामिल हैं।
