राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर की पारंपरिक बनेदी बाड़ी दुर्गापूजाओं में शामिल सिंदूरियापट्टी मल्लिक परिवार की मां सिंहवाहिनी की पूजा इस वर्ष भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित की जा रही है। श्री श्री सिंहवाहिनी माता शारदीय दुर्गोत्सव के आयोजन एवं संचालन की जिम्मेदारी सिंदूरियापट्टी मल्लिक परिवार निभा रहा है। परिवार की चित्रादासी ठाकुरबाड़ी स्थित श्री श्री राधागोविन्द जीउ मंदिर में होने वाली इस पूजा का इतिहास लगभग 413 वर्षों पुराना बताया जाता है।
परिवार के युवा सेवायत सप्तश्री मल्लिक के अनुसार, पूजा में पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष ध्यान रखा जाता है। पारिवारिक मान्यताओं और जनश्रुतियों के मुताबिक, मां सिंहवाहिनी का विग्रह 1,500 वर्ष से भी अधिक प्राचीन माना जाता है। मान्यता है कि यह विग्रह मूल रूप से सातवीं शताब्दी में वर्धन राजवंश के राज्यवर्धन गृहदेवता के रूप में पूजित था। बाद में इसके चटगांव के चंद्रनाथ पर्वत की एक गुफा में सुरक्षित रखे जाने की कथा प्रचलित है। पारिवारिक परंपरा के अनुसार, लगभग 1614 में पूर्वज बनमाली दे मल्लिक अथवा वैद्यनाथ दे मल्लिक को स्वप्न में देवी का आदेश मिला था। इसके बाद वे विग्रह को त्रिवेणी स्थित पैतृक निवास लेकर आए। बाद में परिवार के कोलकाता स्थानांतरित होने पर देवी को भी यहां लाया गया। इस पूजा से जुड़ी एक अन्य ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, वर्ष 1883 में संत श्रीरामकृष्ण परमहंस ने मल्लिक परिवार के निवास पर पदार्पण किया था। मां सिंहवाहिनी की प्रतिमा विशाल रजत सिंहासन पर विराजमान है। देवी के दोनों चरण एक विशाल दंतयुक्त सिंह पर स्थित हैं, जिसके अग्रपाद हाथी के मस्तक पर टिके हुए हैं। प्रतिमा का यह अनूठा स्वरूप पूजा का प्रमुख आकर्षण है। परिवार की ओर से श्रद्धालुओं को उत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है।
