सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : असम-पश्चिम बंगाल सीमा पर अलीपुरदुआर के श्रीरामपुर चेकपोस्ट पर 17 सितंबर से रॉ पेट्रोलियम कोक (RPC) लदे ट्रकों के रोके जाने से औद्योगिक आपूर्ति शृंखला पर संकट गहराता जा रहा है। बरौनी कैल्साइनर्स एसोसिएशन ने पश्चिम बंगाल सरकार के राज्य जीएसटी विभाग से सभी ट्रकों को तत्काल छोड़ने की मांग की है। एसोसिएशन का दावा है कि ट्रकों के फंसे रहने से सरकारी राजस्व, परिवहन कारोबार और विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। एसोसिएशन की ओर से जीएसटी विभाग के सहायक आयुक्त को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इस मामले में 10 अक्टूबर को भी ईमेल के माध्यम से विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया गया था। पत्र के अनुसार, कमर्शियल टैक्सेस के आयुक्त ने 9 अक्टूबर को एक से दो दिनों के भीतर ट्रकों को छोड़ने का आश्वासन दिया था। एसोसिएशन ने आग्रह किया है कि आश्वासन के अनुरूप सभी ट्रकों को तत्काल छोड़ा जाए।
आईओसीएल को 100 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री प्रभावित होने का दावा
पत्र में कहा गया है कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की असम स्थित रिफाइनरियां प्रतिदिन सामान्य तौर पर RPC के 25 से 30 ट्रक भेजती हैं। इनकी कीमत करीब 4 से 5 करोड़ रुपये प्रतिदिन बताई गई है। ट्रकों की आवाजाही बाधित होने के कारण अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री प्रभावित होने का दावा किया गया है। एसोसिएशन के मुताबिक, रिफाइनरियों में RPC का स्टॉक भी जमा होता जा रहा है, जिससे परिचालन पर असर पड़ने की आशंका है। एसोसिएशन का कहना है कि सभी खेपों के दस्तावेज उपलब्ध हैं और उन पर जीएसटी का भुगतान किया गया है। इसके बावजूद 24 दिनों से ट्रकों को रोके जाने का कोई लिखित आदेश या स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है।
जीएसटी राजस्व और परिवहन कारोबार पर भी असर
एसोसिएशन ने कहा है कि आपूर्ति बाधित होने से इन वस्तुओं की बिक्री पर मिलने वाला जीएसटी राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। वहीं, ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों को प्रतिदिन 4 से 5 लाख रुपये तक का डिटेंशन चार्ज देना पड़ रहा है। पत्र में दावा किया गया है कि यह खर्च अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जबकि ट्रकों में लदा करीब 30 करोड़ रुपये का माल फंसा हुआ है। RPC की आपूर्ति रुकने का असर कैल्साइंड पेट्रोलियम कोक (CPC) बनाने वाली कंपनियों पर भी पड़ने का दावा किया गया है। एसोसिएशन के अनुसार, रेन सीआईआई कार्बन, पेट्रो कार्बन एंड केमिकल्स लिमिटेड, एसीएल पेट्रो प्रोडक्ट्स लिमिटेड, गोवा कार्बन लिमिटेड और सनवीरा लिमिटेड जैसी कंपनियां कच्चे माल की कमी के कारण उत्पादन घटाने या बंद करने की स्थिति में हैं। इसके अलावा, नाल्को, हिंडाल्को, वेदांता लिमिटेड, ग्रेफाइट इंडिया लिमिटेड और एचईजी लिमिटेड जैसी कंपनियों को भी कैल्साइंड पेट्रोलियम कोक की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह कच्चा माल एल्युमीनियम और ग्रेफाइट उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
दुर्गापूजा के दौरान परिवार से दूर रहने से ट्रक ड्राइवर अवसाद में
एसोसिएशन ने ट्रकों के चालकों की स्थिति पर भी चिंता जताई है। पत्र के अनुसार, सैकड़ों चालक तीन सप्ताह से अधिक समय से सीमा पर फंसे हुए हैं। दुर्गापूजा के दौरान परिवार से दूर रहने और लंबे समय तक इंतजार करने के कारण उन्हें मानसिक एवं शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इनका कहना है कि क्या ट्रक ड्राइवर इंसान नहीं हैं? पूरा देश दशहरा मना रहा है, पर सैकड़ों ड्राइवर 17 सितंबर से श्रीरामपुर बॉर्डर पर फंसे हैं। 3 हफ्ते से ज्यादा हो गए, परिवार से दूर हैं। न कोई लिखित आदेश, न कोई कारण। आखिर इनका गुनाह क्या है कि इन्हें त्योहार भी नहीं मनाने दिया जा रहा?
