भारत में खासकर त्योहारों पर रंगोली यानी फर्श सज्जा आवश्यक समझी जाती थी। फर्श सज्जा विभिन्न सामग्रियों से होती है। गुजरात, महाराष्ट्र में इस तरह की सजावट को रंगोली कहते हैं । दक्षिण भारत में कोलम, आन्ध्र प्रदेश में मोंगलू और बंगाल में अल्पना के नाम से जानी जाती है। रंगोली दीवाली पर, विवाह के अवसर पर, उत्सवों पर, पूजा स्थान पर बनाई जाती है। रंगोली बनाने में निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिये-
स्थान का चुनाव:-
सर्वप्रथम रंगोली बनाने के लिये घर में स्थान का चुनाव करना चाहिए। प्रायः रंगोली बनाने के लिए घर का प्रवेश द्वारा अथवा आँगन उपयुक्त रहता है।
स्थान साफ करना:-
उपयुक्त स्थान चुनने के पश्चात् उस स्थान को धोकर साफ कर दें तथा स्वच्छ कपड़े से पोंछकर सुखा दें। गांव में जहां कच्चे फर्श होते हैं वहां गोबर व पीली मिट्टी से लीपा जाता है।
फर्श पर डिज़ाइन बनाना :-
फर्श पर चॉक की सहायता से रंगोली का डिजाइन बनाया जाता है । रंगोली के लिये कई आकार के डिज़ाइन बनाये जा सकते हैं जैसे गोल, चोकोर, तिकोन, आयताकार आदि । इन आकारों में मूलतः तीन प्रकार के डिजाइन बनाये जाते हैं-
1. ज्यामितीय
2. फूलों तथा पत्तियों के डिज़ाइन
3. पशु पक्षियों की आकृति के डिज़ाइन
रंग भरना :-
डिज़ाइन बनाने के पश्चात् उनमें विविध आकर्षक रंग भरे जाते हैं। प्रायः चटकीले रंग जैसे लाल, हरा, नीला, पीला, बैंगनी रंग आदि भरने से रंगोली अधिक आकर्षक लगती है। रंग भरने के लिए विभिन्न प्रकार की चीजें इस्तेमाल की जाती हैं जैसे चावल को पीसकर बनाया गया पाउडर, सूखे रंग का पॉउडर, फूलों की पंखुड़ियां इत्यादि। फूलों की पंखुडि़यों का प्रयोग करते समय गीली बालू का प्रयोग किया जाता है।
उपर्युक्त जानकारी के आधार पर अब आप भी रंगोली को अधिक प्रभावशाली बना सकती हैं तथा त्योहारों के अवसर पर अतिथियों के लिए वैलकम व पूजाघर के लिए ओउम् व स्वास्तिक के डिजाइन बना सकती हैं। (उर्वशी)मोनू ‘मनु‘
