सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा से जुड़ी दर्दनाक घटना की विस्तृत जांच करने और जनसुरक्षा एवं भीड़ नियंत्रण से संबंधित पहलुओं की समीक्षा के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट से परामर्श करके बंगाल सरकार ने इस विशेष जांच दल के गठन का निर्देश दिया है। जांच की आवश्यकता के अनुसार SIT राज्य सरकार की अनुमति से किसी भी पद के अधिकारी को अपने साथ जोड़ सकती है। सभी संबंधित विभागों और प्राधिकरणों को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। SIT को आदेश जारी होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सभी तथ्यों और सिफारिशों के साथ अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी। रिपोर्ट पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार विचार करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ये हैं SIT के सदस्य
इस विशेष जांच दल में कुल छह सदस्य शामिल हैं :
सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता राय सरस्वती — अध्यक्ष।
आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव — सदस्य।
पश्चिम बंगाल STF के पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक (DG & IG) — सदस्य।
पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक के प्रतिनिधि, जो अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के पद से नीचे के नहीं होंगे — सदस्य।
गृह एवं पहाड़ी मामलों के विभाग के प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव के पद से नीचे के नहीं होंगे — सदस्य।
कोलकाता स्थित राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के प्रतिनिधि — सदस्य।
SIT किन पहलुओं की जांच करेगी ?
1. बुनियादी ढांचे की सुरक्षा
पूजा पंडाल तक आने-जाने के रास्तों, बैरिकेडिंग, सीढ़ियों, प्रवेश द्वारों, आपातकालीन निकास और अन्य संरचनात्मक व्यवस्थाओं की सुरक्षा का मूल्यांकन किया जाएगा।
1. प्रशासन और आयोजकों की तैयारियां
पूजा समिति, निजी सुरक्षा कर्मियों, स्वयंसेवकों, पुलिस, एम्बुलेंस सेवाओं, अस्पतालों, अग्निशमन विभाग और नागरिक प्रशासन की तैयारियों तथा घटना के दौरान उनकी प्रतिक्रिया के समय की जांच होगी।
इसके अलावा निम्नलिखित साक्ष्यों की भी गहन जांच की जाएगी:
CCTV फुटेज और मोबाइल वीडियो।
फॉरेंसिक रिपोर्ट।
कॉल रिकॉर्ड।
पुलिस थानों और कंट्रोल रूम के लॉग।
चिकित्सा संबंधी दस्तावेज।
जिम्मेदारी तय करना और लापरवाही की जांच
SIT यह पता लगाएगी कि आयोजकों, पुलिस प्रशासन, कोलकाता नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD), अग्निशमन विभाग, CSC लिमिटेड या किसी अन्य संस्था अथवा व्यक्ति की ओर से कोई लापरवाही, निष्क्रियता, जिम्मेदारी निभाने में चूक या आपसी समन्वय की कमी हुई थी या नहीं। यदि किसी की जिम्मेदारी या लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
भविष्य में भीड़ नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश
विशेष रूप से उत्तर कोलकाता जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों और संकरी गलियों में बड़े दुर्गा पूजा आयोजनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दिशा-निर्देश तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल होंगे :
वैज्ञानिक आधार पर अधिकतम भीड़ की सीमा निर्धारित करना।
प्रवेश और निकास के लिए उचित मार्ग सुनिश्चित करना।
CCTV निगरानी की व्यवस्था।
सार्वजनिक उद्घोषणा (Public Address) प्रणाली।
आपातकालीन निकासी और बचाव की विस्तृत योजना।
पीड़ितों को मुआवजा और पुनर्वास
घटना से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को दी गई या दी जाने वाली सहायता, मुआवजे और पुनर्वास संबंधी उपायों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाने की भी सिफारिश की जाएगी।