कोलकाता : दुर्गापूजा के दौरान पंडाल घूमने के साथ एग रोल, फिश फ्राई, चाउमीन और मोमोज का स्वाद लेना इस बार लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और रसोई में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री की कीमतें बढ़ने से कोलकाता के स्ट्रीट फूड विक्रेता खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
इससे त्योहार के दौरान आम लोगों का खानपान बजट प्रभावित होने की आशंका है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विक्रेताओं के लिए बढ़ती लागत के बीच पुरानी कीमतों पर कारोबार करना मुश्किल हो रहा है।
एलपीजी सिलेंडर 70 रुपये महंगा, प्याज भी 70 रुपये किलो के पार
कोलकाता में 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत सितंबर में 2,884 रुपये थी, जो एक अक्टूबर से बढ़कर 2,954 रुपये हो गई। इसके साथ ही प्याज की कीमत 70 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है। अंडे, चीनी और मैदा के दाम बढ़ने से फास्ट फूड कारोबारियों की लागत में भी इजाफा हुआ है।
बड़ा बाजार के फास्ट फूड विक्रेता विकास के मुताबिक, पहले त्योहार के दौरान अधिक बिक्री से बढ़ी लागत की भरपाई हो जाती थी, लेकिन इस बार लगभग सभी जरूरी सामग्री महंगी हो गई है। ऐसे में रोल और चाउमीन की पुरानी कीमतें बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।
मैदा और अंडे महंगे होने से रोल-चाउमीन की लागत बढ़ी
रोल, पराठे और तले हुए स्नैक्स में इस्तेमाल होने वाला मैदा थोक बाजार में गुणवत्ता के अनुसार 38 से 52 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। अंडों की बढ़ती कीमतों का असर एग रोल, एग चाउमीन और एग टोस्ट पर पड़ रहा है। चीनी महंगी होने से चाय की दुकानों, मिठाई कारोबार और बेकरी पर भी दबाव बढ़ा है।
एस्प्लेनेड जैसे व्यस्त इलाकों में स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को आशंका है कि कीमतें ज्यादा बढ़ाने से ग्राहकों की खरीदारी घट सकती है। स्ट्रीट वेंडर्स की माने तो, ये कमाई का सबसे महत्वपूर्ण समय है, लेकिन बढ़ती लागत और ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता के बीच संतुलन बनाना कठिन हो गया है।
पंडाल घूमने वालों का बढ़ेगा बजट, छोटे रेस्तरां भी प्रभावित
खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों का असर केवल अस्थायी स्टॉल तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। कमर्शियल एलपीजी और रोजाना खरीदी जाने वाली सब्जियों, अंडों व आटे पर निर्भर छोटे रेस्तरां, फास्ट फूड आउटलेट और टेकअवे किचन भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसे में इस दुर्गापूजा में स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को मुनाफा बनाए रखने और ग्राहकों को बजट में खाने-पीने का विकल्प देने के बीच संतुलन साधना होगा। वहीं, लोगों को भी पंडाल भ्रमण के साथ खानपान पर होने वाले खर्च की पहले से योजना बनानी पड़ सकती है।
