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लोकतक दिवस को राज्य महोत्सव बनाने पर विचार
১৮/১০/২০২৬

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने दिया आश्वासन
इंफाल :
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने लोकतक दिवस समारोह को राज्य महोत्सव का दर्जा देने के प्रस्ताव की समीक्षा करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि मणिपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकतक झील से जुड़े पारंपरिक महत्व को संरक्षित करने के व्यापक हित में इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। लोकतक दिवस समारोह समिति, कोमलाखोंग के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में उनसे मुलाकात कर यह मांग रखी। इस दौरान मायांग इंफाल के विधायक के. रोबिंद्रो सिंह भी मौजूद थे। समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपा प्रस्ताव
लोकतक दिवस समारोह समिति, कोमलाखोंग के अध्यक्ष असेम शरत सिंह और सचिव युमनाम शांतकुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मिला। प्रतिनिधियों ने लोकतक दिवस को राज्य महोत्सव के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। विधायक के. रोबिंद्रो सिंह ने भी इस पहल में भाग लिया।समिति का मानना है कि राज्य स्तर पर महोत्सव का दर्जा मिलने से लोकतक झील के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व को व्यापक पहचान मिल सकेगी। इसके साथ ही झील के संरक्षण के प्रति आम लोगों की जागरूकता बढ़ाने और स्थानीय परंपराओं को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही। हालांकि, इसे राज्य महोत्सव घोषित करने के संबंध में अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील
लोकतक झील मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में स्थित है और पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील के रूप में प्रसिद्ध है। यह राज्य की प्राकृतिक धरोहर के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका, मत्स्य पालन और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है। झील में तैरते हुए वनस्पति द्वीपों को स्थानीय भाषा में ‘फुमदी’ कहा जाता है। ये झील के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लोकतक झील के दक्षिणी भाग में स्थित केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान अपनी अनूठी तैरती भूमि के लिए जाना जाता है और संकटग्रस्त संगाई हिरण का प्राकृतिक आवास है। झील का महत्व केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय लोगों की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवनशैली से भी गहराई से जुड़ी हुई है। इसलिए इसके संरक्षण को मणिपुर के पर्यावरण और विरासत की रक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है।संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर
लोकतक दिवस को राज्य महोत्सव का दर्जा देने का प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब राज्य सरकार झील के संरक्षण और सतत विकास पर भी ध्यान दे रही है। इससे पहले 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लोकतक झील और काकचिंग जिले के फुमलेनपत आर्द्रभूमि के संरक्षण से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई थी।बैठक में झील के पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, गाद जमने की समस्या को नियंत्रित करने, जलग्रहण क्षेत्र में वनों की कटाई रोकने और झील में बढ़ती फुमदी वनस्पति के प्रबंधन जैसे विषय उठाए गए थे। झील में मिलने वाली जलधाराओं की सफाई तथा आसपास रहने वाले लोगों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर विकसित करने पर भी जोर दिया गया था।सरकार ने लोकतक झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया है। इसके साथ ही पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और झील की प्राकृतिक विशेषताओं को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।गोरखा समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मिले मुख्यमंत्री
इसी दिन मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर गोरखा वेलफेयर यूनियन के प्रतिनिधिमंडल से भी मुलाकात की। यूनियन के अध्यक्ष सी. बी. बिष्ट और उपाध्यक्ष बी. पी. विकास बसनेत के नेतृत्व में आए प्रतिनिधियों ने राज्य में गोरखा समुदाय के विकास और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।इस बैठक में समुदाय की आवश्यकताओं और विकास संबंधी विषयों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा गया। हालांकि, इस मुलाकात के दौरान उठाए गए मुद्दों और उन पर सरकार की ओर से लिए गए निर्णयों का विस्तृत ब्योरा तत्काल उपलब्ध नहीं हुआ।लोकतक दिवस को राज्य महोत्सव का दर्जा देने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री का सकारात्मक रुख झील के संरक्षण और मणिपुर की सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब प्रस्ताव पर सरकार के विचार और अंतिम निर्णय का इंतजार है।মূল প্রতিবেদনে যান ↗