वर्षों बाद शुरू हुए विकास कार्य में नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत का ग्रामीणों ने लगाया आरोप, जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
जामुड़िया : पश्चिम बर्दवान जिले के बिजयनगर मोड़ से बीरकुल्टी तक निर्माणाधीन सरकारी सड़क की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वर्षों बाद शुरू हुए इस विकास कार्य में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और सरकारी मानकों के पालन पर सवाल उठाते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने नेताओं, अधिकारियों और निर्माण कंपनी के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी धन के उपयोग का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस संबंध में जिलाधिकारी को संबोधित लिखित आवेदन सौंपा गया है। इसकी प्रतिलिपि प्रखंड विकास पदाधिकारी और जामुड़िया थाना प्रभारी को भी दी गई है। आवेदन में सड़क के साथ बन रही नालियों के निर्माण की गुणवत्ता की भी जांच कराने का आग्रह किया गया है।
निर्माण कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल
बिजयनगर गांव के नागरिकों की ओर से उठाए गए सवालों के बीच स्थानीय निवासी गौतम बिस्वास ने कहा कि लंबे इंतजार के बाद ग्रामीणों को सड़क निर्माण की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता जरूरी है। यदि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की अनदेखी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित निर्माण कंपनी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की तय होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों की निगरानी में लापरवाही और प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
तकनीकी जांच और कार्रवाई की मांग
आवेदन में सड़क की मोटाई, सीमेंट, बालू और स्टोन चिप्स के निर्धारित अनुपात, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता तथा सरकारी तकनीकी विनिर्देशों की जांच की मांग की गई है। ग्रामीणों ने निर्माण स्थल से नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण कराने तथा कार्यादेश, प्राक्कलन और माप पुस्तिका की जांच करने का भी आग्रह किया है।
ग्रामीणों ने कहना है कि जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित ठेकेदार, निर्माण कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर दोषपूर्ण निर्माण को दोबारा कराया जाए, ताकि सरकारी धन की बर्बादी रुके और लोगों को टिकाऊ सड़क मिल सके। अब प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर टिकी है।
