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मातृ-नवजात मृत्यु दर घटाने को मिजोरम में नई पहल
১৭/১০/২০২৬

सुमन रोडमैप 2030 का शुभारंभ
मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से नीचे लाने का लक्ष्य
संस्थागत प्रसव 93 प्रतिशत और पहली तिमाही में प्रसवपूर्व पंजीकरण 81 प्रतिशत
आइजोल :
मिजोरम सरकार ने गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं को समय पर, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने तथा मातृ एवं नवजात शिशुओं की रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने के उद्देश्य से सुमन रोडमैप 2030 की शुरुआत की है। राज्य की स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री लालरिनपुई ने 16 अक्टूबर को आइजोल में प्रजनन, मातृ, नवजात एवं बाल स्वास्थ्य (आरएमएनसीएच) कार्यक्रम की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान इस रोडमैप का शुभारंभ किया। यह पहल केंद्र सरकार की सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) योजना का हिस्सा है, जिसे 2019 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना है। मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य
स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने कहा कि सुमन रोडमैप 2030 माताओं और नवजात शिशुओं के जीवन की सुरक्षा के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके तहत वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात को प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 70 से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही नवजात और बाल मृत्यु दर में और कमी लाने तथा ऐसी मौतों को रोकने पर जोर दिया जाएगा, जिन्हें समय पर चिकित्सा सहायता और उचित स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से टाला जा सकता है।उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच, प्रसव के समय प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और प्रसव के बाद मां तथा बच्चे की उचित देखभाल मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जिला प्रशासन, कार्यक्रम अधिकारियों और स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया।मंत्री ने सरकारी विभागों, विभिन्न संगठनों और स्थानीय समुदायों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, रोडमैप की सफलता का आकलन इस आधार पर किया जाएगा कि गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार कितना मिल रहा है, कितने नवजात शिशुओं की जान बचाई जा रही है और कितनी रोकी जा सकने वाली मौतों को टाला जा रहा है।संस्थागत प्रसव में 93 प्रतिशत तक पहुंची उपलब्धि
बैठक में स्वास्थ्य सचिव लालजारमावी ने राज्य में मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में मिजोरम में संस्थागत प्रसव का अनुपात लगभग 93 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं में पहली तिमाही के दौरान प्रसवपूर्व देखभाल के लिए पंजीकरण का अनुपात करीब 81 प्रतिशत रहा।ये आंकड़े राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ने का संकेत देते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि इन उपलब्धियों के बावजूद कई क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। विशेष रूप से दूरस्थ और स्वास्थ्य सुविधाओं से अपेक्षाकृत कम जुड़े इलाकों में गर्भवती महिलाओं तक समय पर सेवाएं पहुंचाना एक चुनौती है।उन्होंने अधिकारियों से समीक्षा बैठक में सामने आए निष्कर्षों को ठोस कार्ययोजना में बदलने और राज्य तथा जिला स्तर पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।दक्षिणी जिलों में संस्थागत प्रसव बढ़ाने की चुनौती
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि राज्य के कुछ जिलों में संस्थागत प्रसव की दर अपेक्षाकृत कम बनी हुई है। इनमें दक्षिणी जिले लॉन्गतलाई और लुंगलेई के साथ राज्य का एकमात्र आकांक्षी जिला ममित शामिल है।इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, परिवहन और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने से संबंधित चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ स्थानों पर अब भी प्रशिक्षित प्रसव सहायकों की मदद के बिना घरों में प्रसव होने की घटनाएं सामने आती हैं। इससे मां और नवजात शिशु के स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ सकता है, खासकर तब जब प्रसव के दौरान कोई जटिलता उत्पन्न हो जाए।ऐसे मामलों को कम करने के लिए गर्भवती महिलाओं का समय रहते पंजीकरण, नियमित प्रसवपूर्व जांच, संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने की व्यवस्था मजबूत करना आवश्यक है।स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय और निगरानी पर जोर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक आर. लालछुआनावमा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में जिलावार स्वास्थ्य संकेतकों, कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता से संबंधित समस्याओं की समीक्षा की गई। इसमें मरीजों को एक स्वास्थ्य केंद्र से दूसरे केंद्र तक भेजने की व्यवस्था, स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और चिकित्सा सेवाओं के वितरण से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।बैठक में अधिकारियों ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई और समयबद्ध निगरानी की जरूरत पर बल दिया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं और बच्चों तक भी पहुंचे।सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात के लिए रोडमैप
सुमन रोडमैप 2030 के माध्यम से मिजोरम सरकार का प्रयास गर्भावस्था से लेकर प्रसव और उसके बाद तक महिलाओं तथा नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत मातृ मृत्यु अनुपात कम करने के साथ नवजात और बाल मृत्यु दर में सुधार तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।राज्य सरकार के सामने अब प्रमुख चुनौती निर्धारित लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने की है। विशेष रूप से लॉन्गतलाई, लुंगलेई और ममित जैसे क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करना, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता सुनिश्चित करना और प्रसवपूर्व देखभाल का दायरा बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को समीक्षा बैठक के निष्कर्षों के आधार पर ठोस कदम उठाने और उनकी प्रगति की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि विभागों, स्वास्थ्य संस्थानों और समुदायों के बीच बेहतर समन्वय से वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने के लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति होगी।মূল প্রতিবেদনে যান ↗