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खासी परिषद के फैसलों से असंतुष्ट कुछ हिमाओं का विरोध, डेनजिल चेन ने दी सफाई
১৬/১০/২০২৬

शिलांग :
मेघालय में खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (केएचएडीसी) की कार्यकारी समिति के फैसलों को लेकर विवाद सामने आया है। परिषद के एलाका विभाग के प्रभारी कार्यकारी सदस्य डेनजिल चेन ने कहा कि कुछ हिमाओं (पारंपरिक खासी प्रमुखों के क्षेत्रीय प्रशासन) ने कार्यकारी समिति के निर्णयों से असहमति जताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जबकि कुछ अन्य ने परिषद कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया है। चेन ने यह बात केएचएडीसी की कार्यकारी समिति के कामकाज पर हुई चर्चा के दौरान कही। इस चर्चा की शुरुआत विपक्ष के नेता टिटोस चाइन ने की थी। इसमें विपक्षी सदस्य पियुस मारवेन, रिकी शुल्लई, बारिकुपर सिनरेम और सराली राशिर ने भी हिस्सा लिया। मुकदमों की संख्या से फैसले गलत साबित नहीं होते
डेनजिल चेन ने कार्यकारी समिति के खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दायर होने की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि अदालत में मामलों की संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि समिति के फैसले गलत हैं। उन्होंने कहा कि अदालत याचिकाओं को इसलिए स्वीकार करती है, ताकि संबंधित मुद्दों की जांच हो सके और दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी निर्णय से असंतुष्ट पक्ष को न्यायिक प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है। हालांकि, मुकदमा दायर होने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि संबंधित निर्णय कानून के विरुद्ध है। विरोध जताना लोकतांत्रिक अधिकार
चेन ने कहा कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में लोगों को अपने मतभेद और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है। कुछ लोग अदालत में याचिका दाखिल करते हैं, जबकि अन्य परिषद कार्यालय के सामने प्रदर्शन करके अपना विरोध दर्ज कराते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध करने वाले कुछ लोगों की संख्या को पूरे समुदाय की राय नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, किसी मुद्दे पर असहमति जताने वाले लोगों की मौजूदगी से यह जरूरी नहीं कि सभी संबंधित लोग उसी विचार से सहमत हों। उच्च न्यायालय के फैसलों को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
चेन ने यह भी उल्लेख किया कि मेघालय उच्च न्यायालय के फैसलों के खिलाफ भी कुछ पक्षकार उच्चतम न्यायालय का रुख कर रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि विवादित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया विभिन्न स्तरों पर आगे बढ़ सकती है। केएचएडीसी की कार्यकारी समिति और हिमाओं के बीच मतभेदों से जुड़े मामलों में आगे की स्थिति संबंधित याचिकाओं और न्यायालयों के निर्णयों पर निर्भर करेगी। फिलहाल, डेनजिल चेन ने कार्यकारी समिति के फैसलों का बचाव करते हुए कहा है कि मुकदमों या विरोध प्रदर्शनों की संख्या के आधार पर ही किसी निर्णय की वैधता निर्धारित नहीं की जा सकती।মূল প্রতিবেদনে যান ↗