सूरज, सन्मार्ग संवाददाता
आसनसोल / बर्नपुर : बंगाल की परंपरा और आस्था का सबसे भावुक पल विजयदशमी पर सिंदूर खेला के रूप में देखने को मिला। मां दुर्गा की विदाई से पहले सुहागिन महिलाओं ने ढाक की थाप और शंखनाद के बीच मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर सिंदूर की होली खेली। पंडाल में सुबह से ही महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी थी। लाल-सफेद साड़ी, हाथों में शंखा-पोला और माथे पर सिंदूर लगाए महिलाएं मां दुर्गा के सामने पहुंचीं। पहले उन्होंने मां की मांग में सिंदूर लगाया, पान-सुपारी अर्पित की और अपने सुहाग की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया और जमकर सिंदूर खेला। पूरा पंडाल लाल रंग से गुलाल हो गया। ढाक बजा, उलू ध्वनि गूंजी और हर कई महिलाओं की आंखें नम थीं, कारण आज मां दुर्गा कैलाश के लिए विदा हो रही थीं।।इस अवसर पर बुजुर्ग महिलाओं ने कहा कि सिंदूर खेला सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति, एकता और अखंड सुहाग का प्रतीक है। मां दुर्गा को अपनी सखी मानकर महिलाएं अपने दिल की बात उनके साथ साझा करती हैं। सिंदूर खेला के बाद महिलाओं ने देवी से प्रार्थना की कि अगले साल मां फिर से आएं और सभी के जीवन में खुशहाली लाएं की प्रार्थना की।
