रायबरेली : बतरस 2026 के त्रिदिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने साहित्यिक यात्रा के माध्यम से हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और क्षेत्र की साहित्यिक विभूतियों के योगदान को याद किया। बतरस की ओर से आयोजित इस यात्रा की शुरुआत मधुकरपुर से हुई।
यात्रा के दौरान प्रतिभागी आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के पैतृक आवास दौलतपुर पहुंचे। इसके बाद अक्षर विज्ञान के प्रणेता पंडित रघुनंदन प्रसाद शर्मा के पैतृक आवास छिंटीखेड़ा में उनके जीवन और साहित्यिक योगदान को स्मरण किया गया। कार्यक्रम का समापन एबीएस पब्लिक स्कूल, सैदापुर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ हुआ।
दौलतपुर में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को किया याद
साहित्यिक यात्रा के पहले पड़ाव दौलतपुर में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के पैतृक आवास पर प्रतिभागियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के संयोजक सुनील सरगम और कंपोजिट विद्यालय दौलतपुर के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
इसके बाद पुस्तकालय में आयोजित स्मरण संवाद सत्र में महेंद्र मिश्र, आकांक्षा आदित्य, संकल्प श्रोत्रिय, नवीन चंद्र सिंह और दिनेश प्रियमन ने भाग लिया। इस सत्र में आचार्य द्विवेदी के साहित्यिक योगदान और हिंदी भाषा के विकास में उनकी भूमिका को याद किया गया।
पं. रघुनंदन प्रसाद शर्मा के पैतृक आवास पर पहुंचा साहित्यिक दल
यात्रा का अगला पड़ाव छिंटीखेड़ा स्थित पंडित रघुनंदन प्रसाद शर्मा का पैतृक आवास रहा। यहां उनके परिजनों ने साहित्यकार से जुड़ी स्मृतियों और वस्तुओं को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। उन्होंने शर्मा जी का संदूक, उनका वाद्य यंत्र और ढोलक सहित अन्य वस्तुएं दिखाईं तथा उनके जीवन से जुड़े संस्मरण सुनाए।
इस अवसर पर प्रतिभागियों को उनके व्यक्तित्व, रचनात्मक कार्यों और साहित्यिक साधना से परिचित होने का अवसर मिला। यात्रा का यह चरण साहित्यिक विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।
एबीएस पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
साहित्यिक यात्रा के बाद बतरस परिवार एबीएस पब्लिक स्कूल, सैदापुर पहुंचा, जहां ‘महावीर प्रसाद द्विवेदी एवं रघुनंदन प्रसाद शर्मा : विविध आयाम’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेश सिंह ने की। उन्होंने अपने संबोधन में बैसवाड़े की भाषा और वहां की रचनाधर्मिता के महत्व पर प्रकाश डाला।
संगोष्ठी में वक्ता के रूप में डॉ. रामनरेश, डॉ. आदित्य अभिनव, डॉ. संजय जायसवाल, डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ. प्रीति सिंह, दीप अमन और रूद्र कांत झा उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने दोनों साहित्यकारों के योगदान और उनके लेखन के विविध पक्षों पर विस्तार से चर्चा की।
हिंदी भाषा के परिष्कार में द्विवेदी का योगदान रेखांकित
वक्ताओं ने कहा कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने हिंदी की खड़ी बोली के परिमार्जन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने साहित्य को ज्ञान, संवेदना, नैतिकता और आधुनिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया। उनके प्रयासों ने हिंदी साहित्य को नई दिशा देने के साथ भाषा को अधिक व्यवस्थित और प्रभावशाली बनाने में योगदान दिया।
वहीं, पंडित रघुनंदन प्रसाद शर्मा के साहित्यिक अवदान पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने अक्षर विज्ञान और वैदिक साहित्य के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण लेखन को रेखांकित किया। वक्ताओं के अनुसार, दोनों साहित्यकारों का योगदान हिंदी साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
संगोष्ठी का संचालन सुरेश सिंह ने किया। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ गायक सतीश कुमार सिंह ने मधुर गीत प्रस्तुत किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों की व्यापक भागीदारी
इस अवसर पर बतरस परिवार के डॉ. शैलेश प्रताप सिंह, डॉ. कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, शिवेंद्र सिंह, राजकुमार श्रीवास्तव, दिलीप श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह अंकुर, भूपेंद्र सिंह, डॉ. स्वाती सिन्हा, आकांक्षा आदित्य, अनुराग शुक्ल, अरुण कुमार, पूजा पाठक, अशोक सिंह, कृति बरनवाल, अंकुश, असित पांडे, मंटू दास और हंसराज सहित सैकड़ों साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रिंसिपल अरुण कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया और आयोजन में शामिल अतिथियों, वक्ताओं तथा प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
बतरस 2026 के दूसरे दिन आयोजित साहित्यिक यात्रा और राष्ट्रीय संगोष्ठी ने क्षेत्र की साहित्यिक विरासत को स्मरण करने, महत्वपूर्ण रचनाकारों के योगदान पर संवाद स्थापित करने और नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य के इतिहास से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।
