एक सप्ताह से कोयला उत्पादन और परिवहन ठप, प्रदूषण, पेयजल संकट और मोबाइल नेटवर्क की समस्या को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश
जामुड़िया : पश्चिम बर्दवान जिले के कवितीर्थ चुरुलिया स्थित तारा माइंस (पीडीसीएल) में विभिन्न समस्याओं को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से चुरुलिया तथा आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों ने माइंस में कोयला उत्पादन और परिवहन ठप कर रखा है। इसी क्रम में गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष हाथों में भाजपा का झंडा लेकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने माइंस प्रबंधन पर स्थानीय समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तत्काल समाधान की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि तारा माइंस से प्रतिदिन ओवरलोड कोयला वाहनों के माध्यम से साइडिंग तक ले जाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं। इसके अलावा ओपन कास्ट परियोजना (ओसीपी) से कोयला उत्पादन के बाद गांवों के आसपास मिट्टी के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ बना दिए गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इससे आसपास के इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की सेवा भी प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र में गहराते पेयजल संकट को लेकर भी चिंता जताई। उनका आरोप है कि तारा माइंस (पीडीसीएल) प्रबंधन ओसीपी का दूषित पानी पंप के माध्यम से अजय नदी में छोड़ रहा है, जिससे नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि नदी के जल प्रदूषण और पेयजल की समस्या के बावजूद संबंधित प्रशासन की ओर से अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
स्थानीय भाजपा नेता गोपी पात्र ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) तथा जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की गई है। इसके बावजूद ग्रामीणों की शिकायतों पर कोई ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
वहीं, आंदोलन और ग्रामीणों की मांगों को लेकर पीडीसीएल प्रबंधन के अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल उत्पादन और परिवहन बंद रहने से माइंस का कामकाज प्रभावित है। ग्रामीणों ने समस्याओं के समाधान तक अपना विरोध जारी रखने के संकेत दिए हैं।
