कोलकाता: कलकत्ता विश्वविद्यालय ने स्नातक विद्यार्थियों के मूल्यांकन की व्यवस्था में बदलाव किया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्नातक पाठ्यक्रमों में ग्रेडिंग प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही कक्षाओं में उपस्थिति के लिए भी अंक दिए जाएंगे। विश्वविद्यालय के इस फैसले का उद्देश्य विद्यार्थियों के प्रदर्शन का आकलन एक समान पद्धति से करना और नियमित रूप से कक्षाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
विश्वविद्यालय के सिंडिकेट की मंजूरी के बाद जारी अधिसूचना के अनुसार, नई व्यवस्था में प्रत्येक सेमेस्टर में ग्रेड पॉइंट के आधार पर विद्यार्थियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। यह बदलाव नए शैक्षणिक सत्र में स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों पर लागू होगा। विश्वविद्यालय के कुलपति आशुतोष घोष के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में ग्रेडिंग व्यवस्था का प्रावधान है। राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन में समानता लाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
किस अंक पर कौन-सा ग्रेड मिलेगा?
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को उनके प्राप्तांकों के आधार पर ग्रेड और ग्रेड पॉइंट दिए जाएंगे। इसका विवरण इस प्रकार है:
90 से 100 अंक: उत्कृष्ट (ओ) ग्रेड, 10 ग्रेड पॉइंट
80 से 89 अंक: अति उत्कृष्ट (ए प्लस) ग्रेड, 9 ग्रेड पॉइंट
70 से 79 अंक: बहुत अच्छा (ए) ग्रेड, 8 ग्रेड पॉइंट
60 से 69 अंक: अच्छा (बी प्लस) ग्रेड, 7 ग्रेड पॉइंट
50 से 59 अंक: औसत से ऊपर (बी) ग्रेड, 6 ग्रेड पॉइंट
40 से 49 अंक: औसत (सी) ग्रेड, 5 ग्रेड पॉइंट
30 से 39 अंक: उत्तीर्ण (पी) ग्रेड, 4 ग्रेड पॉइंट
30 से कम अंक: अनुत्तीर्ण (एफ) ग्रेड, शून्य ग्रेड पॉइंट
इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को अपने प्रदर्शन का स्तर समझने और अगले सेमेस्टर में सुधार के लिए लक्ष्य तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
उपस्थिति के लिए मिलेंगे पांच अंक
ग्रेडिंग प्रणाली के साथ विश्वविद्यालय ने आंतरिक मूल्यांकन में उपस्थिति के अंकों को भी दोबारा शामिल किया है। कुल 25 अंकों के आंतरिक मूल्यांकन में 20 अंक आंतरिक परीक्षा या संबंधित मूल्यांकन के लिए और पांच अंक उपस्थिति के लिए निर्धारित किए गए हैं।
विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के प्राचार्यों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि उपस्थिति के लिए अंक निर्धारित होने से विद्यार्थियों को नियमित रूप से कक्षाओं में आने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। कॉलेजों में लंबे समय से कम उपस्थिति को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
नियमित कक्षाओं पर रहेगा जोर
कॉलेजों के शिक्षकों और प्राचार्यों के अनुसार, पाठ्यक्रम और क्रेडिट ढांचे में बदलाव के बाद उपस्थिति के लिए अलग से अंक देने की व्यवस्था समाप्त हो गई थी। इसके बाद कक्षाओं में विद्यार्थियों की भागीदारी को लेकर चुनौतियां सामने आईं। नई व्यवस्था से नियमित उपस्थिति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय के इस फैसले से विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ उनकी कक्षा में भागीदारी को भी महत्व मिलेगा। हालांकि, नई व्यवस्था का वास्तविक असर आने वाले सेमेस्टरों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और परिणामों के आधार पर स्पष्ट होगा।
