जलपाईगुड़ी : जलपाईगुड़ी जिला परिषद के अपने आय कोष की स्थिति इन दिनों चिंताजनक बनी हुई है। सीमित आय के स्रोतों के बीच 52 संविदा कर्मचारियों के मासिक वेतन में तीन हजार रुपये की बढ़ोतरी किए जाने से परिषद पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया है। अगले महीने से बढ़े हुए वेतन का भुगतान कैसे किया जाएगा, इसे लेकर चिंता जताई जा रही है। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े राज्य सरकारी कर्मचारी कल्याण संघ ने परिषद के अपने फंड की बदहाल स्थिति के लिए कथित तौर पर अनियोजित खर्च को जिम्मेदार ठहराया है।
फिलहाल जिला परिषद की अपनी आय का प्रमुख स्रोत कोलकाता हाईकोर्ट के जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच के पुराने अस्थायी भवन से मिलने वाला किराया और हाट-बाजारों से होने वाली राजस्व वसूली है। इस वर्ष सर्किट बेंच पहाड़पुर स्थित स्थायी भवन में स्थानांतरित हो चुका है, लेकिन हाईकोर्ट ने अभी तक स्टेशन रोड स्थित पुराने भवन को खाली नहीं किया है। ऐसे में उससे मिलने वाला मासिक किराया जिला परिषद की आय का एक प्रमुख आधार बना हुआ है। यदि यह भवन खाली हो जाता है, तो परिषद की आर्थिक परेशानी और बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, डुआर्स के विभिन्न हाटों से राजस्व वसूली भी कर्मचारियों की कमी के कारण प्रभावित हो रही है। लगातार हाट प्रभारियों के सेवानिवृत्त होने से निगरानी व्यवस्था कमजोर हुई है। हालांकि, राजस्व वसूली में ऑनलाइन सेवाओं का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी अब भी चुनौती बनी हुई है।
जिला परिषद का धूपगुड़ी डाकबंगला भी अपेक्षित आय नहीं दे पा रहा है। वहीं, मरम्मत कार्य के कारण मेटेली का डाकबंगला और कोलकाता के सॉल्टलेक स्थित जलपाईगुड़ी भवन फिलहाल बंद हैं। योजना के अनुसार, दुर्गापूजा के बाद दोनों भवनों को दोबारा शुरू किया जाएगा। मरम्मत के बाद मेटेली भवन को विवाह समारोह के लिए 40 हजार रुपये और एसी कमरे को 1,200 रुपये में किराये पर देने की योजना है। सॉल्टलेक स्थित जलपाईगुड़ी भवन में डॉर्मिटरी बेड का किराया 300 रुपये और एसी डबल बेड कमरे का किराया दो हजार रुपये निर्धारित किया गया है।
इस बीच, संविदा कर्मचारियों के वेतन वृद्धि को लेकर भी विवाद सामने आया। कर्मचारियों का मासिक वेतन पहले एक हजार रुपये बढ़ाने की घोषणा की गई थी, जिसके विरोध में शुक्रवार को उन्होंने काम बंद कर दिया। बाद में बढ़ोतरी तीन हजार रुपये किए जाने की घोषणा के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन वापस ले लिया। 52 कर्मचारियों के वेतन में तीन हजार रुपये की बढ़ोतरी से हर महीने कुल एक लाख 56 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा।
राज्य सरकारी कर्मचारी कल्याण संघ के जिला संयोजक कमल दास ने आरोप लगाया कि जिला परिषद के अपने फंड से मनोरंजन और अन्य मदों में अनियोजित खर्च किए जाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने परिषद से आय बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाने की मांग की। वहीं, संघ की जिला परिषद इकाई के संयोजक अरूप कुमार मल्लिक ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में संविदा कर्मचारियों के वेतन में तीन से पांच हजार रुपये तक की वृद्धि की गई है। ऐसे में जलपाईगुड़ी में वेतन बढ़ोतरी के मामले में देरी और टालमटोल क्यों हुई, यह समझ से परे है।
दूसरी ओर, जिला परिषद की सभाधिपति कृष्णा राय बर्मन ने कहा कि सॉल्टलेक स्थित जलपाईगुड़ी भवन और मेटेली के भवन की मरम्मत कर उन्हें नए सिरे से चालू करने की तैयारी है। साथ ही, हाटों से राजस्व वसूली बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
