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कौन सनातनी है, यह मैं नहीं बता सकता : कोलकाता पुलिस आयुक्त
২৪/১০/২০২৬

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता :
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान केवल सनातन धर्म में आस्था रखने वालों के ही प्रतिमा को स्पर्श करने संबंधी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बयान पर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय नंद ने स्पष्ट किया है कि विसर्जन में कौन शामिल होगा, इसका निर्णय संबंधित पूजा समितियां करती हैं। पुलिस की इसमें कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। हालांकि, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पूजा समितियों को निर्धारित नियमों के अनुसार विसर्जन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।बाबूघाट में मुख्यमंत्री ने दिए थे निर्देश
बुधवार को कोलकाता के बाबूघाट में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि प्रतिमा को केवल सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले लोग ही स्पर्श करेंगे। उन्होंने यह भी बताया था कि उन्होंने कोलकाता पुलिस आयुक्त को विसर्जन में शामिल होने वाले लोगों के नाम दर्ज करने और उनकी पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।‘विसर्जन में शामिल होने वालों का फैसला पूजा समितियां करेंगी’
शुक्रवार को लालबाजार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस आयुक्त अजय नंद से इस संबंध में सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि विसर्जन में कौन शामिल होगा, यह पूजा समितियां तय करती हैं। पुलिस की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान निर्धारित नहीं करती है। इस संबंध में पूजा समितियों को जानकारी दे दी गई है और उन्हें नियमों के अनुसार पूजा एवं विसर्जन संपन्न कराने के लिए कहा गया है।‘कौन सनातनी है, यह मैं नहीं बता सकता’
यह पूछे जाने पर कि किसी व्यक्ति के सनातनी होने या नहीं होने की पहचान कैसे की जाएगी, पुलिस आयुक्त ने कहा कि यह बताना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने दोहराया कि इस मामले को पूजा समितियों के समक्ष रखा गया है और उन्हें निर्धारित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस आयुक्त ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी में सनातन पद्धति के अलावा किसी अन्य तरीके से पूजा संपन्न किए जाने का मामला नहीं है। मुख्यमंत्री के निर्देश और पुलिस आयुक्त के बयान के बाद अब विसर्जन की व्यवस्था में पूजा समितियों की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, प्रतिमा को स्पर्श करने के लिए धार्मिक पहचान निर्धारित करने के मुद्दे पर विवाद जारी है।মূল প্রতিবেদনে যান ↗