सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम -- मुख्य सचिव ज्ञानेश भारती की अध्यक्षता वाली राज्य पशु रोग आपात समिति ने द्वीपों में अफ्रीकी स्वाइन फ्लू की मौजूदा स्थिति और इसके प्रसार को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा की। बैठक में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग का एक दल भी शामिल हुआ, जिसका नेतृत्व पशुपालन आयुक्त डॉक्टर नवीना बी. महेश्वरप्पा ने किया।
तीनों जिलों के उपायुक्तों ने समिति को मौजूदा स्थिति और रोग नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। श्री विजय पुरम के प्रभावित क्षेत्रों में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सूअरों को मारने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, नमूना संग्रह, कीटाणुशोधन और जन जागरूकता गतिविधियां भी तेज की जा रही हैं।
बैठक में पशुपालन आयुक्त ने कड़े जैव सुरक्षा उपायों, संदिग्ध मामलों की समय पर सूचना, नियमित निगरानी और मृत सूअरों के सुरक्षित निपटान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने रोग का प्रसार रोकने के लिए सूअरों और पोर्क उत्पादों की अनधिकृत आवाजाही रोकने के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अफ्रीकी स्वाइन फ्लू पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाला रोग नहीं है और यह मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता।
मुख्य सचिव ने पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग को अगले तीन महीनों के लिए कीटाणुनाशक और सुरक्षा उपकरण सहित आवश्यक सामग्री का पर्याप्त भंडार बनाए रखने का निर्देश दिया। पत्तन प्रबंधन बोर्ड, विमानन प्राधिकरणों और जिला प्रशासनों को भी निगरानी मजबूत करने और पोर्क व पोर्क उत्पादों के परिवहन पर लागू प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया।
प्रशासन ने सूअर पालकों और आम जनता से पशु चिकित्सा अधिकारियों के साथ सहयोग करने, निर्धारित जैव सुरक्षा उपायों का पालन करने और सूअरों में किसी भी संदिग्ध बीमारी या मौत की सूचना तुरंत निकटतम पशु चिकित्सा संस्थान को देने की अपील की है।
