अंडाल:: ईसीएल के केंदा क्षेत्र अंतर्गत सिदुली कोलियरी की जेके यूनिट में पानी भरने से भूमिगत कार्य (माइनिंग ऑपरेशन) ठप होने के बाद प्रबंधन द्वारा करीब 500 कामगारों का भूमिगत भत्ता (अंडरग्राउंड अलाउंस) रोके जाने का आदेश जारी किया है। इस आदेश से श्रमिकों में भारी आक्रोश है। AITUC से संबद्ध कोलियरी मजदूर सभा (CMS) ने प्रबंधन के इस रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जानकारी के मुताबिक, सिदुली कोलियरी प्रबंधन ने एक नोटिस जारी कर बताया कि गत 5 अक्टूबर को जेके यूनिट के भूमिगत खदान क्षेत्र में अचानक पानी भर गया। इसके मद्देनजर आगामी आदेश तक भूमिगत गतिविधियों को स्थगित कर दिया गया है। कैप लैंप जारी करने पर तत्काल रोक लगा दी गई है और केवल सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से आवश्यक सतही (सरफेस) कार्य कराने का निर्देश दिया गया है। इसी आदेश में प्रबंधन ने कार्य निलंबन अवधि के दौरान किसी भी कामगार को भूमिगत भत्ता नहीं देने की घोषणा कर दी।
लापरवाही प्रबंधन की, तो सजा मजदूरों को क्यों
प्रबंधन के इस फैसले के विरोध में CMS के सचिव व केंदा एरिया जेसीसी सदस्य राजेंद्र राम ने कोलियरी अभिकर्ता को पत्र सौंपकर फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है। राजेंद्र राम ने कहा कि खदान में पानी भरना प्रबंधन की गंभीर विफलता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा है। इसमें मजदूरों की कोई गलती नहीं है, तो फिर भत्ते में कटौती की सजा श्रमिकों को क्यों दी जा रही है?
यूनियन ने बहुला कोलियरी का हवाला देते हुए याद दिलाया कि वहां भूमिगत खदान में आग लगने के कारण कार्य बंद रहने के बावजूद तत्कालीन अभिकर्ता के निर्देश पर कामगारों को भूमिगत भत्ता दिया गया था। उल्लेखनीय है कि वही अधिकारी वर्तमान में केंदा एरिया के महाप्रबंधक हैं। यूनियन ने दो टूक कहा कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो कोलियरी स्तर पर उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
प्रबंधन का पक्ष
मामले को लेकर ईसीएल के एक अधिकारी ने बताया कि जब खदान में जलभराव के कारण कामकाज पूरी तरह बंद है और कामगार नीचे नहीं जा रहे हैं, तो नियमों के तहत भूमिगत भत्ता देने का कोई औचित्य नहीं बनता। स्थिति सामान्य होने के बाद ही नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
