अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े कानून के तहत कुछ प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के लागू होने से छूट देने का आदेश जारी किया है। शुक्रवार रात जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि मौजूदा समय में कुछ प्रतिबंधों को लागू नहीं करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इस छूट के राष्ट्रीय हित में होने के संबंध में कांग्रेस को प्रमाणपत्र भी सौंपा है। इस फैसले को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों, खासकर भारत और चीन, के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, आदेश के तहत किस देश या किन विशिष्ट प्रावधानों को कितनी सीमा तक छूट मिली है, यह स्पष्ट किए बिना भारत पर सभी संभावित टैरिफ पूरी तरह हटने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर बने Sanctioning Russia and Iran Act को ग्राहम एक्ट कहा जाता है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और रूसी तेल व गैस के सबसे बड़े खरीदारों से आयात होने वाले सामान पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस ने इस कानून को 16 सितंबर को पारित किया था और ट्रंप ने दो दिन बाद इस पर हस्ताक्षर किए थे।
कानून में प्रावधान है कि इसके लागू होने के 30 दिनों के भीतर अमेरिका उन पांच सबसे बड़े देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है, जो रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं।
कानून की धारा 113 में रूसी मूल के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खरीद करने वाले अथवा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।
ग्राहम एक्ट की धारा 115 अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के लागू होने से छूट देने का अधिकार देती है।
ट्रंप ने अपने आदेश में कहा कि वह कानून की धारा 115(ए) के तहत धारा 112 और 113 या अपने आदेश में निर्धारित कुछ शुल्कों के लागू होने से छूट दे रहे हैं।
इस कदम से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन के पास कानून के तहत टैरिफ लागू करने के मामले में कुछ विवेकाधिकार है। हालांकि, इस छूट का वास्तविक प्रभाव संबंधित प्रावधानों और आदेश के दायरे पर निर्भर करेगा।
यह छूट ऐसे समय में दी गई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस के साथ अमेरिका और वैश्विक बाजारों के लिए डीजल की आपूर्ति को लेकर समझौता किया है। यह फैसला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा से कुछ दिन पहले भी आया है।
रुबियो की प्रस्तावित यात्रा के मद्देनजर इस घटनाक्रम को भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार और रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर होने वाली बातचीत के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो के साथ बैठक में ग्राहम एक्ट को लेकर भारत की चिंताएं उठाई थीं।
बताया जाता है कि जयशंकर ने अमेरिकी पक्ष को समझाया था कि भारत की तेल रिफाइनरियां मुख्य रूप से मीडियम-सॉर क्रूड के प्रसंस्करण के लिए तैयार की गई हैं। इस श्रेणी का तेल मध्य पूर्व के देशों और रूस से मिलता है।
उन्होंने यह भी बताया था कि वेनेजुएला से मिलने वाला कच्चा तेल अपेक्षाकृत भारी श्रेणी का है, जबकि अमेरिका का तेल हल्की श्रेणी का होता है। भारतीय रिफाइनरियों में अमेरिकी तेल का इस्तेमाल करने से पहले उसे दूसरे तेल के साथ मिलाने की जरूरत पड़ सकती है।
ईरान युद्ध के कारण मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारत के लिए रूसी कच्चे तेल की उपलब्धता महत्वपूर्ण बनी हुई है। देश की ऊर्जा जरूरतों और अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए तेल की स्थिर आपूर्ति जरूरी है।
ऐसे में ग्राहम एक्ट के तहत संभावित टैरिफ भारत के लिए ऊर्जा लागत और अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों को प्रभावित कर सकते थे।
ट्रंप के नए आदेश से प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने के मामले में कुछ राहत मिलने की संभावना है। लेकिन भारत पर संभावित टैरिफ का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि छूट किन प्रावधानों पर लागू होती है और अमेरिकी प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।
